सुप्रभात दोस्तों
आप सभी की कुशलता और प्रसन्नता की कामना इश्वर से करता हुँ।
आप बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं,
आप बोलेंगे कि मैं महत्वपूर्ण कैसे हुँ ?
मैं बताता हुँ,आपको...
आप पुत्र के रुप में, अपने माता पिता ले लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
आप भाई के रुप में अपनी बहन और भाईयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं।आप अपने दोस्तों के लिए बहुत अजीज हैं, आप बच्चो के लिए सब कुछ हैं, आप अपनी पत्नी अथवा प्रेमिका के जीवन के आधार हैं, आपकी और आपके अनुभव की समाज को बहुत आवश्यकता हैं। आपकी अनुपलब्धता में जो रिक्तता रहती हैं, उसे भर पाना सम्भव नही होता।
हैं न आप बहुत महत्वपूर्ण ।
भले ही आप धनवान नहीं हैं
भले ही आप ज्यादा पढे लिखे नही हैं।
भले ही आप कम कमाते हैं।
अपने माँ बाप और परिवार के लिए आपका महत्व इन सब पर निर्भर नही हैं।
उपरोक्त बातें मैं आपको इसलिये बता रहा हुँ, की कल शाम की एक घटना नें मुझे बहुत व्यथित किया। मुझे ऐसा लगा, कि कितने गेरजिम्मेदार हैं हम, लापरवाही की भी हद होती हैं।
कल शाम को मैं शहर से घर आ रहा था, लगभग गोधुली या इसके थोडे बाद का समय, जिस समय गाड़ियों की रोशनी कुछ ज्यादा ही परेशान करती हैं, आंखो को। मेरी कार लगभग 80-90 की रफ़्तार से चल रही थी। एक लगभग 17 वर्ष के आस पास का बालक मोटरसाइकिल से मेरे आगे आगे चल रहा था। उसके पीछे एक लगभग 11 साल का बालक बैठा था, जो संभवतया उसी का छोटा भाई या कोई नजदीकी रिश्तेदार था। उस मोटरसाइकिल की गति मेरी कार से ज्यादा थी। जहाँ तक मेरी जानकारी हैं, 18 वर्ष से कम उम्र में लाईसेंस नही बनता होगा।
घटित होने वाली घटना की आशंका से ही सिरहन सी होने लगती हैं।
वो नादान बालक, 100 की गति में मोटरसाइकिल, और जो भी इस लापरवाही का शिकार होगा, वो सामने वाला बदनसीब कौन होगा।
क्या वो बालक माँ बाप की इच्छा के बिना इस समय सडक पर थे?
क्या उनको पता नही, कि क्या हो सकता हैं?
यदि कुछ भी घटित होता, तो जिम्मेदारी किसकी होती?
ऐसी कोई घटना घटित हो जाने के बाद घर में होने वाले कोहराम का दृश्य...
क्या कोई माँ बाप, जिनकी कोई संतान एसी दुर्घटना में चली गयी, वापिस नॉर्मल जीवन जी पाते हैं?
हो सकता हैं, इस प्रकार की लापरवाही करने वालों को अपनी संतान की ज्यादा परवाह न हो, पर जो इनकी चपेट में आयेगा, वो अपने परिवार का अजीज हो।
संभाले उन्हें
जीवन में न तो विकल्प मिलते हैं, न दुबारा मौके मिलते हैं।
एक बार की गलती, जीवन भर का पछ्तावा बनकर न रह जाए,
इसलिये
संभाले उन्हे...