जो तीर भी आता वो खाली नही जाता
मायूस मेरे दिल से सवाली नही जाता
काँटे ही किया करते है फूलों की हिफाज़त
फूलों को बचाने कोई माली नही जाता
कमी लिबास की
तन पर अजीब लगती है
मुझे अमीर बाप की बेटी
ग़रीब लगती है
ज़ख्म कहां कहां से मिले है
छोड़ इन बातो को
जिन्दगी तू तो ये बता
सफर कितना बाकी है
काबलियत है तो अंधेरे में चमँक कर दिखाओ
रोशनी में तो कांच भी हीरा
होने का दावा कर सकता है