: सरकार द्वारा हर साल बैंकों के लिये कृषि ऋण लक्ष्य घोषित करने की नीति जोखिमपूर्ण है, यह लंबे समय में फूटने वाला बुलबुला साबित हो सकता है। ये बात पिछले साल ही रिजर्व बैंक से सेवानिवृत हुये पूर्व डिप्टी गवर्नर एच आर खान ने मुंबई में एक उद्योग संगठन द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में कही।
खान के अनुसार सरकार जो लक्ष्य तय करती है, बैंकिंग तंत्र उसे पूरा करने के लिये काफी सक्रिय रहता है। इसमें से अधिकतर अल्पकालिक फसली ऋण ही होते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस तरह प्राप्त राशि का एक चौथाई धन सोना खरीदने के लिये भी इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश के जरिये उसकी दीर्घकालिक जरूरत को पूरा करने की आवश्यकता है। पिछले कुछ साल के दौरान कृषि क्षेत्र का कर्ज जहां 18 प्रतिशत बढ़ा है वहीं कृषि उत्पादन केवल 12 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ विभिन्न कारणों के चलते किसानों की आय लगातार कम हो रही है। उनकी उपज का कम मूल्य होना, मजदूरी का बोझ बढ़ना और कृषि में काम आने वाले विभिन्न सामानों की लागत बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं। उन्होने कहा कि कृषि क्षेत्र में भंडार गृहों, आपूर्ति श्रंखला और दूसरी ढांचागत सुविधाओं में निवेश बढ़ाने की