1 . बच्चो के खातों की बजाय उनको कॉपी ,पेन्सिल , बुक्स ,वर्दी, बैग दिया जाए।
2. सभी स्कूलों में सोलर सिस्टम लगा कर लाइट की व्यवस्था की जाये।
3. स्कूलों में R O लगाकर पीने के पानी की उचित व्यवस्था की जाए।
4. बच्चों के बैठने के लिए डेस्क की व्यवस्था की जाए।
5 . बुक्स , बैग , वर्दी, स्टेशनरी स्कूल के अप्रैल महीने में ही मिल जाने चाहिए।
6 वार्षिक प्राइमरी स्कूलों में मिलने वाली 12000 की राशि को 50,000 किया जाए या प्रति कमरा 5000 रू की राशि हो ।
7 . अध्यापक से गैर शैक्षिक कार्य को हटाकर आउट सोर्सिंग से उन कार्यों को करवाया जाए।
8. रिक्त पदों में समय रहते जिला स्तर पर हर वर्ष मेरिट आधार पर अनुबंध पर लगा दिया जाए जब तक रेगुलर अध्यापक नहीं आता है।
9. प्रत्येक 3 वर्ष पर विद्यालय रंग रोगन की व्यवस्था की जाए।
10. अध्यापक की भर्ती से राजनीति दूर हो।
11.प्रत्येक स्कूल में मुख्य शिक्षक अनिवार्य हो ।
12. पार्ट टाइम स्वीपर की जगह स्वीपर/चौकीदार/चपडासी एक फोर्थकलास फुल टाइम हो ।
13. सभी सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़े नहीं तो उनको एजुकेशन अलाउंस नहीं मिलेगा।
14. अधिकारियों को रेगुलर मॉनिटरिंग में Mid Day Meal को पीछे रखकर क्लास को मॉनिटर पहले करना होगा।
15. अधिकारी सुनिश्चित करें की बच्चों की नोट बुक हर दिन चैक हो और हर दिन काम मिले।
हमारी नियत साफ़ हो और सरकार की नियत साफ़ हो तो सरकारी स्कूलों में भी गरीब का बच्चा अच्छी एजुकेशन ले सकेगा और समृद्ध व स्वतंत्र भारत निर्माण का सपना जल्दी पूरा हो जाएगा।
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