दूरियों ने जगह बना ली है,
अब न कोई फिकर है तुम्हे,
तुम खुश हो दूर रेहकर हमसे,
हम खुश है खुश देखकर तुम्हे।
जब दुरिया बिच में आजाती है,
न कुछ भी अच्छा लगता है,
रातें लंबी होजाती है,
आँखों से आंसू छलक जाती है।
दूर रहकर जो खुश हो तुम,
हम सेह लेंगे तेरी ख़ुशी में अपने गम,
जब बात आएगी तुम्हारी कभी,
न आसु रोक पाएंगे हम।
सोचते रहते है हरदम ये,
क्यू हमसे ये रुसवाई,
क्या हुई खता जो बिच में आई,
दुरियो ने क्यू जगह बनाई।
हर दर्द सेह लेंगे हम,
दूरियों ही सही,
भले हर पल रोयेंगे हम,
अब तुम्हारी कसम कुछ न बोलेंगे हम।