तूने आकर क्या कर दिया
धुली हुई वस्त्र मिली थी
अपनी काली-करतूतों की वजह से
खमोखा गन्दा कर दिया।
आया था कुछ और काम के लिए
कर कुछ और रहा है।
दुनियावी कामों में उलझकर
अपनी सही मंजिल को भूल रहा है।
मौत की तुझे जरा भी ख़याल नहीं
तू तो हरपल मौत के करीब जा रहा है।
क्या लेकर आये थे
जो उसे खो जाने से डरते हो
ये पैसा रुपया क्षणभंगुर हे
फिर उसे जान से ज्यादा क्यूँ प्यार करते हो।