अस्सलामू अलैकुम दोस्तों, मैं हूं नुसरत और आज मैं आपको एक बहुत प्यारी हदीस के बारे में बताने जा रही हूं। मुझे उम्मीद है की आपको ये हदीस पढ़कर अच्छा लगेगा और आप अपने ईमान को और मजबूत करेंगे।
अनअबि हुरैराता रजि अल्लाहु अनहु , अन्ना रसुल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काला : (लाव ला अन आशुकका आला उम्माति ला अमरतुहुम बिस्वकिहि इंदा कुल्ला सलातिन)
(मुत्ताफकुन अलै)
तरजुमा
अबु हुरैरा राजी अल्लाहु अनहु से रवायत हे की अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : अगर मै अपनी उम्मत पर दुसवार ना समझता तो हर नमाज के लिए मिसवाक करने का हुक्म देता
(बुखारि ,847 : मुस्लिम , 252 )
उसके फवाईद :-
हर नमाज के लिए मिसवाक करना मुसतहब है, वाजिब नही है।
(मुसतहब का मतलब होता है, कि अगर करोगे तो सवाब है और नही करोगे तो गुनाह नही होगा)
मिसवाक के मुसतहब होने का वक्त, वक़्त वजु है , दिगर अवकात मे मिसवाक या ब्रश करना मुसतहब नही है।
कुछ ऐसे वक़्त मे मिसवाक करना वाजिब हो जाता है जैसे लहसुन, प्याज, खाने से।
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