जिनके अंतःकरण में गहन भावनाएँ, चिंतन और अनुभव हैं, वे समाज के सामने उस गहन भावनाओं को नग्न रूप में नहीं रख सकते क्यों कि उन्हें स्वयं की रक्षा भी करनी है और दूसरों को भी असहज होने से बचना है इसलिए एक मुस्कान और सामान्य होने का "मुखौटा" पहने जरूर मिलेंगे हैं — कभी चुप्पी के गहने से सजे धजे बलखाते निकल जाएंगे चाहे कोई इनकी इस अदा को इनका अंहकार समझे या अयोग्यता!!
This report was published via Actifit app (Android | iOS). Check out the original version here on actifit.io