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भारत एक विचित्रताओं का देश है। यहाँ कोई नियम नहीं, कोई कायदा नहीं। बस जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला हिसाब है। इस हफ्ते इंडिगो की 1300 उड़ानें रद्द हुई। वजह एक DGCA के नियम के हिसाब से उनको अपनी फ्लाइट के दौरान पायलट को हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराना था लेकिन उन्होंने स्टाफ नहीं बढ़ाया। फिर जो हुआ वो एक disaster है।
एक तरफ इंडिया में कंपनियों की मोनोपॉली चल रही है। इंडिगो का शेयर ऐवीऐशन सेक्टर में 2/3 के करीब है जो बहुत ज्यादा है। इसमें सरकार से लेकर कंपनी तक जिम्मेदार हैं। कितने लोगों की फ्लाइट मिस हुई। कितनों के जरूरी काम छूट गए लेकिन जिम्मेदारी किसी की नहीं। दूसरी एयरलाइन्स ने 90 हजार तक डमेस्टिक टिकट बढ़ा दिया। पूरे देश की बेजत्ती हुई। इससे ज्यादा अराजकता क्या होगा। बहुत ही बुरी स्थिति है।
Aisa business model duniya mein kahan hoga?