महात्मा हो या साधू कोई भी ऐसा नहीं जिस को स्त्री ने प्रभावित न किया हो मेनका ने विश्मामित्र को प्रभावित किया इंद्र ने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या से छल किया रावण सीता से प्रभावित रहा लेकिन पुरुष आज भी ये बात स्वीकार नहीं करता की स्त्री ही वो है जिस के आगे पुरुष नतमस्तक हो जाता है अष्टकमल युक्त स्त्री सप्तकमल पुरुष ऋग्वेद कह चूका है की नारी पूर्ण है और पुरुष कभी साधू के रूप में की स्त्री से दूर रहना ध्यान या पूजा करो तो जब को नारी की संगति में यदि पाप होता तो भगवान शिव पार्वती को ध्यान की विधि विज्ञानं भैरव क्यों बताते 164 श्लोक और 112 धारणाये क्यों कहते की देवी आप स्वम में पूर्ण हो कृष्ण क्यों राधा के दीवाने होते उन को प्रेम में ही ईश्वर मिलता है ध्यान मन को शांति देता है और कुण्डलिनी जागरण में सिर्फ चमत्कार है लेकिन अमर कोई नहीं होता ये सब करने से हा एक जादूगर जरूर बन जायेगे चमत्कार दिखा सकते है लेकिन यदि जिस दिन तुम ने नारी को समझ लिया और उस के सम्मान में तुम्हारी आँखों में इज़्ज़त आगयी समझो आप का मूलाधार स्वतः जागृत हो जायेगा मतलब मूल + आधार मूल मतलब प्रारभ की नीव जिस पर आप का अस्तित्व टिका है उसे आधार मिल जायेगा नारी के आभामण्डल में आते ही आप का आधा शरीर जो लेफ्ट भाग है वो पूर्ण होने लगता है कुछ लोग डरते है प्याज़ नहीं खायेगे कामुकताआगयी तो सत्ये यही है आप तो पुरुष कम ही इस लायक है की वो स्त्री को कामुकता से नहीं दुलार से देखे सत्ये से मित्रता भाव से मिले तो बदलाब होने लगेंगेशरीर में प्रेम जरूरी है पुरुष के लिए बड़े बड़े लोग महात्मा बने निकले ध्यान की खोज में अंत में म्रत्यु निगल गयी आये घर ही क्यों की ईश्वर प्रेम में है जरा सोचो आप किसी प्यारे दोस्त से मिलने निकलो वे कई साल में उसे खोजो और आप का दोस्त आप से जादा आमिर हो तो सम्भव है की फिर आप को बापस आने दे तो ईश्वर तो बहुत अमीर है पर क्यों फिर बापस आते हो सीधे स्वर्ग नहीं ले जाता मूर्खता है ईश्वर सव जगहाहै नारी का मिल्न करता है आप के शरीर की ऊर्जा में महान बदलाब प्रेम भी एक कला है तुम आँखे बन्द कर के ध्यान लगा सकते हो और यदि प्रेम को ध्यान बना सकते हो अक्षत चावल का आभामण्डल 4 फुट तक होता है पीपल के पेड़ का 15 मीटर तक और ऐसे ही नारी का आभामण्डल 10 फुट तक होता है उस के समीप होने से उस का आभामण्डल आप के आभामण्डल से मिल कर आप में अद्भुत ऊर्जा पैदा करता है नारी में ईश्वर है पर मनुष्ये में पुरुष हु इस भाव से अहंकार युक्त कभी स्वीकार नहीं करता जेसे लहसुन को शाश्त्रो में अमृत कहा है पर कोई वेध ये बताता नहीं क्यों की उस में गन्ध होने के कारण लोग उसे पसन्द नहीं करते ठीक ऐसे ही लोग नारी को सुंदरता के कारन भोग की वस्तु समझ लेते है उस के अस्तित्व में छुपी ममता के सागर को नहीं देख पाते क्यों की नारी के स्तन और चेहरे को देखने से फुरसत मिले तब कोई ह्रदये में झांके नारी को समझे पर अफ़सोस नारी सूत्र शाश्त्र लोगो को पढ़ाया ही नही गयाकुछ लोग तो नाम भी आज सुन रहे होंगे स्त्री कुछ नहीं तुम्हारा सब कुछ है स्त्री बिना पुरुष का कोई अस्तित्व नहीं है******* ZERO SUTRA *****