फ़्रिज की बॉटल भरने को बाध्य हैं,
रोज नहाने को बाध्य हैं,
बिना ब्रश किये चाय नहीं मिलती,
10 बजे तक सोने वालों को अलग ही नजर से देखा जाता है।
एक बार इन सबपर भी सोचिएगा क्या सच में आज़ाद हैं हम
फ़्रिज की बॉटल भरने को बाध्य हैं,
रोज नहाने को बाध्य हैं,
बिना ब्रश किये चाय नहीं मिलती,
10 बजे तक सोने वालों को अलग ही नजर से देखा जाता है।
एक बार इन सबपर भी सोचिएगा क्या सच में आज़ाद हैं हम