अपनी पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए पेड़-पौधे मानव से अधिक सतर्क रहते हैं और चतुर भी हैं। बीमारियों और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने में मानव एक बार धोखा खा सकता है, लेकिन पेड़-पौधे सही वक्त पर उचित निर्णय लेकर अपनी रासायनिक प्रक्रिया में फेरबदल कर सुरक्षा सुनिश्चित कर लेते हैं। यह स्थिति तब है, जब मानव की तरह पेड़-पौधों में न तो मस्तिष्क है और न नर्वस सिस्टम, सिर्फ एक पिगमेंट फाइटोक्रोम की मदद से वे अनुकूलन क्रिया में माहिर हैं।‘
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