बद्रीनाथ के माथे पे खड़ा है नीलकंठ पर्वत, शिव का साक्षात रूप। मैं गया था उस दिन दो बार वहाँ तक पैदल चलके। पहले दिन खराब मौसम की वजह से मुझे वापस आना पड़ा जबकि दूसरे दिन मैं पर्वत के चरणों तक पहुंच गया, जहाँ सिर्फ शांति ही शांति विराजमान थी।
वहाँ की ऊर्जा अलग ही थी, जहाँ एक तरफ ठंडी हवा मुंह पे लग रही थी वहीं दूसरी तरफ पर्वत पर घूमते सफेद बादल मस्ती कर रहे थे।
क्या आप गए हैं बद्रीनाथ मन्दिर?।