विश्व का सबसे लंबा साहित्यिक ग्रंथ महाभारत हमारे प्राचीन भारत का इतिहास है। कहते हैं कि महाभारत की रचना वेदव्यास जी ने की थी। महाभारत लिखना एक दिव्य और अद्भुत कार्य था जो दैवीय कृपा के बिना संभव नहीं था। जब महर्षि वेदव्यास जी ने इस इतिहास को लिखित स्वरूप में उतारना चाहा तो उनके सामने एक समस्या खड़ी हो गई कि महाभारत किससे लिखवाई जाए , क्योंकि वह जानते थे कि यह एक ऐसी कहानी है जो सिर्फ परिवार की नहीं बल्कि इस पूरी संस्कृति का इतिहास है। इसलिए उन्हें एक ऐसे विद्वान की जरूरत थी जो लिखते वक्त कोई गलती ना करें।
गणेश जी की लिखावट इतनी तेज और सुंदर थी कि वेदव्यास जी ने उनका स्मरण करके उनसे महाभारत लिखने का अनुरोध किया था। गणेश जी महाभारत लिखने को तैयार हो गए लेकिन उन्होंने वेदव्यास जी के सामने शर्त रखी कि उनको सारी कथा बिना रुके बतानी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी कलम नीचे रखने के बाद में दोबारा नहीं लिखूंगा , गणेश जी उनकी परीक्षा ले रहे थे यह जानने के लिए कि जो कथा वह बताने जा रहे हैं सच है या कोई मनगढ़ंत कहानी है।
उसके बाद वेदव्यास जी ने श्री गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी,जिसे गणेश जी ने बिना रुके बिना कल नीचे रखे लिख डाला था। भगवान गणेश जी की परीक्षा में वेदव्यास पास हो गए थे। उनके द्वारा बताई गई महाभारत कोई काल्पनिक कथा नहीं थी ये साबित हो गया लेकिन 10 दिन बाद पाया कि 10 दिन की मेहनत के बाद गणेश जी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया है , वेदव्यास जी ने पास के सरोवर में तुरंत ले जाकर गणेश जी के शरीर को ठंडा किया।
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी को पानी में विसर्जित किया जाता है उत्तराखंड में बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर की दूरी पर माना गांव में एक व्यास पोथी नामक स्थान है जहां महाभारत के रचनाकार वेद जी की गुफा है यह भारत का आखिरी गांव है इस गांव के बाद चीन की सीमा शुरू हो जाती है और यहां बसी है वही गुफा जहाँ वेदव्यास जी ने भगवान गणेश जी का स्मरण करके उन्हें महाभारत लिखने का निवेदन किया था।
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