नमस्कार दोस्तों, उन दोनों कुत्तो को फांसी की सजा सुना दी गयी है जिस ने एक 7 साल की बच्ची के साथ रेप किया था। मंदसौर रेप केस की बात कर रहा हूँ मैं जिस में एक सात साल की बच्ची का रेप किया था आसिफ और इरफ़ान ने। ऐसे लोगो को फांसी नहीं होनी चाहिए थी इनको तो जिन्दा जला देना चाहिए साला एक 7 साल की बच्ची को नहीं बक्शा। ऐसे लोगो का समाज में रहने का कोई हक़ नहीं है।
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मुस्लिम लोग कभी भी किसी रेपिस्ट का सपोर्ट नहीं करते है। लेकिन कुछ हिन्दू लोग ऐसे है की अगर कुछ लोगो ने मुस्लिम का रेप किया हो तो फिर रेपिस्ट को बचाने के लिए तिरंगा यात्रा निकालते है। पता नहीं समाज में ऐसे लोग क्यों भरे पड़े है, बच्चे के रेप में भी लोग हिन्दू मुस्लिम देख कर फैसला करते है की करना क्या है।
रेपिस्ट चाहे हिंदी हो या फिर मुस्लिम उसने गलत काम किया है और उसको उसकी सजा मिलनी चाहिए लेकिन कुछ चमन चूतिये है जो रेपिस्ट को बचाने के लिए तिरंगा यात्रा निकालते है।
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ऐसे ही समाज गन्दा हो रहा है रेपिस्ट को बढ़ावा दिया जा रहा है, अगर रेपिस्ट के साथ फैसला जल्दी हो और उन्हें जल्दी से फांसी हो जाए तो सायद ऐसी घटना कम होगी लेकिन यहाँ तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। अभी 2 दिन पहले ही बिहार में एक छोटी सी बच्ची के साथ रेप हुआ लेकिन इस वारदात को कोई नहीं जानता है पता है क्यों?
क्यों की रेप करने वाला भी हिन्दू था और जिस का रेप हुआ वो भी हिन्दू यही वजह है की ये काण्ड ट्रेंड नहीं हुआ अगर यही इस में कोई एक मुस्लिम होता फिर देखना था की क्या होता। आज कल हिन्दू मुस्लिम देख कर फैसला करते है लोग।