I am writer and poet. I write novels, stories, and poems (ghazals). So far I have been writing on wattpad and facebook. I also participate in Mushayaras and have presented my ghazals (poems) on national radio.
Hope to entertain and engage steemian friends with my writing. Thank you for your love in advance.
एक ग़ज़ल (हज़ल) ज़रा अलग मिज़ाज की.....
अदीब होने की ग़फ़लत में अड़ा बैठा है ।
ग़ज़ल के सीने पे कमबख़्त चढ़ा बैठा है ।
जिधर भी देखिए है शायरों की भीड़ यहाँ ,
जिसे भी देखिए ग़ालिब से बड़ा बैठा है ।
ये जब से आया है चुपचाप बहुत है यारों ,
लगे है आज तो ये ख़ुद से लड़ा बैठा है ।
पसंद कौन करे ये वो समर है जो के ,
समय से पहले ही डाली से झड़ा बैठा है ।
जवान था तो कबूतर ये उड़ाता था बहुत ,
इसीलिए तो बुढ़ापे में छड़ा बैठा है ।
किसी भी तंज़ का इस पर नहीं है फ़र्क कोई ,
लगे है मुझसा कोई चिकना घड़ा बैठा है ।
सुना के जाता है 'नादान' सुनेगा तू भी ,
मुख़ालिफ़ैन का तेरे भी धड़ा बैठा है ।
राकेश 'नादान'
Link to my Facebook Profile : https://www.facebook.com/rakesh.tyagi.7923?fref=ufi