Thought #11
Hindi Poetry
मन के गलियारों से निकल,
मष्तिस्क के विचारो को समेट,
शरीर से बाहर आना चाहती है,
अभी कोई रूप नहीं है उसका,
न है कोई आकार,
न अंत पता, न आरम्भ,
किस दिशा में जायेगी,
उसकी खबर भी नहीं,
पर महसूस होती है कहीं,
ऊर्जा का स्रोत लेकर,
बहती है मेरे रक्त में,
ढूंढ रही शब्दों का शरीर,
उद्देश्य रूपी आत्मा,
पाने को नाम और,
एक नयी पहचान,
मेरे अंतर्मन में संघर्ष करती,
सभी चुनौतियों को पार कर,
आगे बढ़ती, बाहर आने को
बेताब, एक नवीन 'कविता'।
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