मैं ये उम्मीद करता हूँ कि हिंदी भाषा आपको भी आता होगा।मैं माफी चाहूंगा अगर आप हिंदी समझने में असमर्थ है। कभी -2 जब मैं खाली होता हुँ तो खुद से जवाब करता फिरता हूँ कि दिल का सुनना चाहिए या दिमाक का?? लोग अपने परिस्थितियों के अनुसार कभी आपको दिल का सुनने के लिए बोलेंगे तो कभी अपने दिमाक का सुनने के लिए बोलेंगे। असल मे जब परिस्थितिया बदलतीं है तब किसी का भी सुझाव समझ मे नही आता कि करना क्या हैं ।कोई भी मुसीबत बता कर नहीं आती और जब आती है तो तूफान की तरह अपने पीछे सिर्फ मायुसी छोड़ जाती है।हर स्कूल में केवल पढ़ना सिखाते है लेकिन कोई परिस्थितियों से झेलने के लिए कोई आपको तैयार नहीं करता।हर एक व्यक्ति के जीवन काल मे एक समय ऐसा आता है या आएगा जिसमें वो अपने आप को टूटा महसूस करेगा। शायद इस समय को आप महसुस कर चुके हो।