Appeal post 03
तुम यहाँ नहीं हो लेकिन एहसास तुम्हारा हर जगह ऐसे मंडराता है जैसे हवा में घुला सुकून। तुम्हारे संग बिताए समय की भरपाई मैं बैठकर तुम्हारी यादों के कौनों में उनसे बात करके पूरी कर लेता हूँ। कभी तुम्हें उंगलियों से छू लेता हूँ तो कभी आंखों से चूम लेता हूँ।
हर रोज़ की तरह आज फिर चलते हैं कहीं ऐसी जगह जहाँ एहसास तुम्हारा नहीं...चलो भरते हैं इश्क से मैदानों को।