एक राजा की कथा, जिसने राजा को अपनी खुशी और हमेशा मुस्कुराने का राज बताया
एक राजा रोज अपनी बग्गी में बैठकर राज्य के भ्रमण पर निकला करता था। एक दिन वह एक मेले में गया, जहां काफी भीड़ थी, लेकिन सबके चेहरे पर उदासी थी। उस साल राज्य में सुखा पड़ा और लोग परेशान थे। सिर्फ एक ही आदमी को राजा ने मुस्कुराते हुए देखा, जो खाने-पीने की एक दुकान पर बैठा हुआ था।
अगले दिन राजा की बग्गी फिर उसी दूकान के सामने से गुजरी। उस दिन भी वह आदमी मुस्कुरा रहा था। राजा ने उसे काफी देर तक देखा, फिर आगे बढ़ गया। एक दिन राजा ने सपने में भी उस आदमी को मुस्कुराते हुए देखा। अगले दिन राजा उसी दुकान पर पंहुचा और बग्गी से उतरकर उसकी तरफ बढ़ने लगा।
उस आदमी के पास एक कटोरा भी था। यानी वह आदमी भिखारी था। राजा सोचने लगा की एक भिखारी आखिर इतना खुश कैसे रह सकता है? राजा ने उससे पूछा, तुम्हारे पास न कपडे हैं, ना घर, ना पैसे, ना परिवार। फिर भी तुम इतना खुश कैसे रह लेते हो? भिखारी बोला, हमारी जितनी क्षमता होती है, हमें उतनी ही चुनोतियां मिलती हैं। और चुनोतियां हमारी क्षमताओं को और मजबूत बनाती हैं। यदि मुझे ज्यादा तकलीफे मिलती हैं, तो मैं यह सोचता हूं कि मै बाकी लोगो के मुकाबले इन तकलीफो का सामना करने की ज्यादा क्षमता रखता हूं।
यह सोचकर मुझे ख़ुशी मिलती है। और जब मैं उन तकलीफो को पार कर लेता हूं, तो यह सोचकर ख़ुशी मिलती है कि मेरा स्तर और ऊँचा हो गया। मुझे विस्वास है कि मैं जहाँ हूं, जैसा भी हूं, और मेरे साथ जो कुछ हो रहा है। ये सारे भाव मेरे चारो तरफ रोशनी पैदा करते हैं और मैं हमेशा ख़ुशी के घेरे में रहता हूं। यह सुनकर राजा की खोई मुस्कान वापस आ गई।
खुशी अपने अंदर होती है, बस हमें उसे पहचाने की जरुरत है।