INCOMPLETE LOVE STORY POEM
कि अपने दिल में रखे दर्द का विस्तार करता हूँ ,
कि सुनो यारो और समझो मैं किसी से प्यार करता हूँ |
कि मेरा दिल है सहमा मैं इसे स्वीकार करता हूँ ,
कि निगाहे जब झुकी उसकी तो मै दीदार करता हूँ |
क्या समझू दिल की नादानी जो उससे प्यार करता हूँ |
कि अपने दिल में रखे दर्द का विस्तार करता हूँ ,
कि सुनो यारो और समझो मैं किसी से प्यार करता हूँ |
मगर मैं दिल में उसके हूँ यही विश्वास करता हूँ |
कि खुदा ये मेल कैसे हो यही फरियाद करता हूँ |
कि अपने दिल में रखे दर्द का विस्तार करता हूँ ,
कि सुनो यारो और समझो मैं किसी से प्यार करता हूँ |
कि मेरी प्यारी चंद्रमुखी मै तुझसे प्यार करता हूँ |
मगर वो तोड़ गयी दिल फिर यही फरियाद करता हूँ |
कि अपने दिल में रखे दर्द का विस्तार करता हूँ ,
कि सुनो यारो और समझो मैं किसी से प्यार करता हूँ |
जरुरत जब पड़ी मिलने की मैंने खुद को बदला था ,
कि मेरी हो सकी न वो मै अब भी प्यार करता हूँ |
कि अपने दिल में रखे दर्द का विस्तार करता हूँ ,
कि सुनो यारो और समझो मैं किसी से प्यार करता हूँ