गैरों के साथ मिलके मुस्कुराया न करो ,
जान सी निकलती है दिल जलाया न करो ।
बातों बातों में लोग बात बना लेते हैं,
राज ए दिल किसी को बताया न करो ।
जान सी निकलती है दिल जलाया न करो
कांच से भी नाजुक है शीशा - ए - दिल ,
बार - बार पत्थरों से टकराया न करो ,
जान सी निकलती है दिल जलाया न करो ।
डर लगता है खुली जुल्फों को देखकर
जादू इन घटाओं का दिखाया न करो
जान सी निकलती है दिल जलाया न करो
छुप छुप के गैर से नजरें न करो चार
प्रियतम ये सितम ढाया न करो
जान सी निकलती है दिल जलाया न करो ।