जब हम किसी विचार को उसके अच्छे बुरे के तराजु में तोलते है, वही से हम समाज को दो हिस्सो में बाट लेते है !!
विचार हमारी कुंडली से जन्म लेता हैं, जो हम देखते है सुनते है बोलते है ओर मेहसुस करते हैं ||
ये सच नहीं तो झूठ भी नहीं ये एक संभवना है आने वाले कल की और बीते हुए कल की, संभवना को अधिक मेहत्व dena कर्म में बाधा हैं