अपने को पहचानो।
आप इस परमपिता की सर्वोत्तम रचना,
जो सर्वशक्तिमान कहलाता है।
हैं अंश उसी अंशी के सब,
जो सबका भाग्य विधाता है।
प्रभु ने हम सबको जग में,
अपना प्रतिनिधि बनाया है।
बल विवेक अरु ज्ञान बुद्धि से,
हम सबको ख़ूब सजाया है।
फिर भी यदि मानव अपने को,
मजबूर ग़रीब बताता है।
अपने को भाग्यहीन समझे,
तो वह महामूर्ख कहलाता है।
प्रभु ने हम सबको इस जग में,
सुख वैभव सम्पन्न बनाया है।
सुखमय जीवन व्यतीत करके,
ख़ुद हँसते और हँसाया है।
आवश्यकता मात्र बस इतनी है,
हम सब अपने को पहचाने।
इस सृष्टि के संचालन में,
अभिकर्ता प्रभु को ही मानें।