**प्रगति के पथ पर**
मन का मैल ,शैल हैं प्रगति में,
मन विचलन, पथ विचलन है|
मन अविलाशी,त्याग समर में,
मन - संघर्ष ही , जीवन है||
तू जाग !अब उठ ! इस नवजीवन में,
सपने बन्द पलक , को छोड़|
नवप्रभात् में सपने बुन ले ,
अवसर है एक अद्भुत मोड़||
उद्देश्य चुना हो निर्भय मन का,
सामर्थ्य भरा हो भावों में |
पहचान तेरी मस्तक से झलके,
विश्वास सरोवर आँखों में ||