Hello friends I am sandeep kumar
and this is my second poem ,
सूरज से यह सीख है मिलती,
सबके जीवन में प्रकाश भरो ।
चन्दा से सीख मिले यह हमको,
सबके मन को शीतल करो ।
धरती से सीख हमें यह मिलती,
धैर्यवान जीवन को बनाओ ।
तारों से सीख मिले यह बन्दे ,
टिम-टिम करते जग में छा जाओ ।
नन्ही चींटी सीख यह देती ,
दृढ़ संकल्प को न त्यागो तुम ।
जीवन में हो कष्ट अनेको ,
पर कर्तव्य से न भागो तुम ।
धैर्य से मन को ध्यान लगाकर ,
अपने लक्ष्य को साधो तुम ।
कहें सन्दीप हे मन मेरे ,
अब तो नींद से जागो तुम ।।
Thanks for all friends
"Sandeep kumar"