चितमिलित प्रकति से पुलकित वह चेतन पुरुष पुरातन।
निज शक्ति तरंगायित था आनंद अम्बु निधि शोभन ।।
भर रहा अंक श्रद्धा का मानव उसको अपना कर ,
था इडा शीश चरणों पर वह पुलक भरी गदगद स्वर ।।
चितमिलित प्रकति से पुलकित वह चेतन पुरुष पुरातन।
निज शक्ति तरंगायित था आनंद अम्बु निधि शोभन ।।
भर रहा अंक श्रद्धा का मानव उसको अपना कर ,
था इडा शीश चरणों पर वह पुलक भरी गदगद स्वर ।।