फैशन बन चुकी शराब, पहले से ज्यादा जानलेवा साबित हो
रही है। देश में शराब से हर साल लगभग 35 हजार लोग मौत के
आगोश में समा रहे हैं देश के अनेक राज्यों में शराब से मौत के
मामले में काफी बढ़त हुई है। स्थिति यह है कि पीने वाले सोचें।
जीना है कि पीना है। कानूनी तौर पर शराब का भारतीय बाजार
7 हजार 740 करोड़ रुपये का है। मदिरापान को आज वर्किग।
क्लास कल्चर कहा जा रहा है, लेकिन यह कल्चर किस हद तक।
पहुँच चुका है ? खासतौर से दिल्लीमुम्बई जैसे शहरों में, इसकी
बानगी यह है कि एसएस के आई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार
'2006 ई. में बियर का उपयोग 51 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं भारत में
बनने वाली विदेशी शराब के उपयोग में 53 प्रतिशत वृद्धि हुई ।
आज 15 से 20 प्रतिशत भारतीय शराब पी रहे हैं।
20 पहले जहाँ 300 लोगों में एक व्यक्ति शराब का सेवन
साल
करता था, वहीं आज 20 में से एक व्यक्ति शराबखोर है। चकाचौंध
भरी जीवन शैली में मदिरापान को आम स्वीकृति मिलने के बाद।
कम उम्र के लोगों द्वारा भी नियमित मदिरापान आम हो गया है।
पांच से दस साल तक लगातार शराब पीने के बाद लीवर की
गम्भीर बीमारियाँ शुरू हो जाती हैं। कम उम्र में शराब पीने के
कारण ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनकी आयु 2530 साल
जठर रोग विशेषज्ञ अजय चौकसी कहते हैं, इसी दारूखोरी
के चलते सिरोसिस जैसी बीमारी आम हो गयी है, लाखों भारतीय।
जिसके शिकार हो रहे हैं। हर महीने हमारे यहाँ इसके सिरोसिस)
4045 मरीज आ रहे हैं। पाँच साल पहले इनकी संख्या आधी थी,
दिल्लीस्थित श्री गंगाराम अस्पताल के लीवर ट्रांसप्लांट विभाग के
प्रमुख डॉ. ए.एस. सॉइन कहते हैं, ‘बहुत प्रामाणिक आंकड़े
उपलब्ध न होने के बावजूद अनुमान यह है कि कोई दो लाख
भारतीय यकृत (लीवर) सम्बन्धी बीमारियों के आखिरी पायदान पर
हैं, जबकि ऐसी बीमारियों के कारण 25 हजार भारतीय हर साल
अपनी जान से हाथ धो रहे हैं।’’ नेशनल लीवर फॉउंडेशनमुम्बई
के सचिव डॉ. समीर शाह कहते हैं, वैसे भारतीय बेडौल नहीं हैं,
लेकिन हमारे यहाँ अब कमर के आसपास चर्बी जमने का
सिलसिला शुरू हो गया है। यही वसा लीवर तक पहुँच जाती है,
जिससे यकृत मोटा हो जाता है। इसी से सिरोसिस भी होता है।