जीवधारियों के जीव में वायु के बाद दूसरा स्थान जल का है। आज भारतवर्ष में शुद्ध जल बहुत कम लोगों को उपलब्ध है। हमारे शहरों तक में जल की शुद्धता पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता और हम अकसर पीने के पानी में कीड़े आदि तक मिलने की सूचनाओं से रू-ब-रू होते हैं। गाँवों आदि में भी इनहाइजिनिक जल का सेवन किया जाता है। आज प्रदूषण का माहौल है। गंगाजी तक का पानी प्रदूषण से लाल हो चुका है।
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भूमिगत जल में भी विभिन्न अशुद्धियों, जैसे आर्गेनिक आदि की मात्रा बढ़ती जा रही है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। सामान्य जन जल के विशेष गुणों से परिचित नहीं हैं। अत: जल; जिसके बिना जीवन की कोई भी क्रिया संपादित नहीं हो सकती; उसकी सब तक उपलब्धता एवं शुद्धता पर ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि अस्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ राष्ट्र की कल्पना करना कठिन है।