स्टीव की कहानी, जिसने मोनिका को बताया कि लड़ना हर समस्या का समाधान नहीं है।
मोनिका काफी दिनों से देख रही थी की स्टीव मैनेजर की हिटलिस्ट पर था। वह जो भी करे, उसका मैनेजर कभी खुश नहीं होता था। आम तौर पर सारे कर्मचारी पांच बजे निकल जाया करते थे। पर स्टीव को मैनेजर अक्सर देर रात तक रोक लिया करता था।
फिर भी स्टीव के चेहरे पर कोई शिकन नजर नहीं आती थी। एक दिन मैनेजर ऑफिस से जल्दी निकल गया, तो मोनिका ने स्टीव की मदद करने का प्रस्ताव रखा। दोनों ने मिलकर काम जल्दी खत्म कर लिया और फिर साथ बैठकर कॉफी पीने लगे।
उसी दौरान मोनिका ने पूछा, तुम पर मैनेजर इतनी ज्यादती करता है, पर तुम कभी आवाज नहीं उठाते । तुम्हे अपने हक़ की लड़ाई लड़नी चाहिए। स्टीव बोला, जब मैं छोटा था, तो मेरा पढ़ाई में मन नहीं लगता था। क्लास में नंबर कम आते थे।
तो शिक्षक नाराज रहा करते थे। दसवीं तक पहुचते-पहुचते सभी शिक्षक मुझसे नाराज रहने लगे थे। इसका खमियाज़ा भी मुझे भुगतना पड़ा, क्योँकि मेने बोर्ड की परीक्षा तो पास कर ली, पर मेरे इंटरनल नंबर बहुत कम हो गए।
पिताजी ने हमेशा की तरह कहा कि जो काम तुमने शूरू किया है, उसे तुम्हे खत्म करना ही पड़ेगा। उधर शिक्षकों ने ठान लिया था कि बारवीं में मुझे पास नहीं होने देंगे। पर मेने भी अच्छे नंबर लाने की ठान ली। मेने दिन रात मेहनत की और अंततः पुरे शहर में टॉप किया।
मैं यही कहना चाहता हूं, की सिर्फ लड़ाई से हर जंग नहीं जीती जाती। मैं चाहूं तो मैनेजर से लड़ सकता हूं, पर मुझे उनसे लड़ना नहीं , उनका दिल जीतने है। वह थोड़े दिन मुझे ज्यादा काम देंगे, मुझ पर दबाव डालेंगे, पर उनका यही रवैया उन्हें मेरे काम पर निर्भर बनाता जायेगा। और अगर ऐसा न हुआ, तो ये तो तय है कि मेरा अनुभव सबसे ज्यादा होगा। मोनिका मुस्कुरायी और बोली,
अंधियारी गली के आगे तुमने एक रोशन सुबह ढूंढ ली है।
हर लड़ाई लड़ कर नहीं जीती जा सकती, कुछ लड़ाइयां हार कर भी जीती जाती हैं।