हमारी संतानहमे पैसा अवश्य कमाना है।
व्यापार , नौकरी या काम भी करना है। क्योंकि सुखी
व सम्पन्न जीवन का आधा भी पैसा ही है। संसार के
सभी कार्यों में पैसा प्रमुखता रखता है। मगर रात दिन
पैसे के पीछे भागते हुए हम अपनी संतान के प्रति अपने
कर्तव्य को कदापि न भूलेंउनकी सेवा, पालन पोषण
व शिक्षित भी करवाना है। उच्च शिक्षा दिलाकर
प्रशिक्षण में भेजें ताकि वो अपना जीवन सुख से गुजार
सकें। साथ ही संतान को धर्म कर्म, समाज व
सामाजिकता से भी अवश्य ही परिचित करायें ताकि