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बिहार में पश्चिम चंपारण जिले के 123 गांवों के लोग बूंद-बूंद पानी की कीमत समझने लगे हैं। सिंचाई में हर बूंद का अधिकतम उपयोग हो रहा है। यहां जल संरक्षण का अनोखा अभियान चल रहा वाटर हार्वेस्टिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसे शब्द हर घर में समझे जाते हैं। इस इलाके में सिंचाई की परंपरागत व्यवस्था बदल रही है। यहां राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) जल संरक्षण जागरूकता अभियान चला रहा है।
पूरे बिहार की तरह पश्चिम चंपारण जिले के इन गांवों में अनियमित मानसून परेशान करता है। देर से बारिश से फसल चौपट हो जाती थी। सिंचाई पर बहुत अधिक खर्च करना पड़ता था। खेती घाटे का सौदा थी। किसान कर्ज तले दब जाते थे। किसानों की तकलीफ समझते हुए नाबार्ड की बेतिया इकाई ने क्षेत्र के 123 गांवों में जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया।
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