1 : - बुद्धिमान वही है जो अपनी कमियों को किसी के सामने उजागर न करें. घर की गुप्त बातें, धन का विनाश, दुष्टों द्वारा धोखा, अपमान, मन का चिंता इन बातों को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए.
2 : - मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.
3 : - विद्वान सब जगह सम्माननीय होता है. अपने उच्च गुणों के कारण देश-विदेश सभी जगह वह पूजनीय होता है .
4 : - विद्या ही सर्वोच्च धन है. विद्या के कारण ही खाली हाथ होने पर भी विदेश में भी धन कमाया जा सकता है तथा मान सम्मान बढ़ाया जा सकता है. विद्या के अभाव में उच्च कुल में जन्मा व्यक्ति भी सम्मान नहीं पाता है.
5 : - सुपात्र को दिए गए धन का फल अनन्त काल तक मिलता रहता है. भूखे को दिए गए भोजन का यश कभी ख़त्म नहीं होता. दान देना सबसे महान कार्य है.
6 : - बिना सत्य के सारा संसार व्यर्थ है. संसार में सब कुछ सत्य पर टिका है. सत्य के तेज से ही सूर्य तपता है, सत्य पर ही पृथ्वी टिकी है, सत्य के प्रभाव से ही वायु बहती है. सत्य ही जीवन का सच है.
7 : - गधा बहुत संतोषी जीव है. थकने पर भी वह बोझ ढोता रहता है, सर्दी-गर्मी कि उसे परवाह नहीं रहती, संतुष्ट भाव से जो मिल जाये, उसी से गुजर बसर करना, ये बातें गधे से सीखनी चाहिए.
8 : - जो मनुष्य न तो विद्वान है, न दानी है, न साधक, जिसमें शीलता का अभाव है, गुणहीन है, अधर्मी है- ऐसा मनुष्य पशु के समान है. ऐसे मनुष्य पृथ्वी पर भार के समान है.
9 : - भावनाएं इंसान को इंसान से जोड़ती हैं. दूर रहने वाला भी यदि हमारा प्रिय है तो वह हमेशा दिल के पास रहता है, जबकि पास रहने वाला भी हमारे दिल से कोसों दूर ही रहता है क्योंकि उसके लिए हमारे दिल में जगह नहीं होती.
10 : - क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.
11 : - एक गुण सैकड़ों अवगुणों को छिपा लेता है. जिस प्रकार केवड़ा में कांटे होते है, कीचड़ में पैदा होता है, फिर भी अपनी सुगंध से सबको अपनी और आकर्षित करता है. गुलाब में भी कांटे होते है, लेकिन उसकी मधुर सुगंध उसके इस दोष को ढक लेती है.
12 : - अपने रहस्य किसी के सामने भी भूल कर उजागर नहीं करने चाहिए, कुछ तो ऐसे कहे गए हैं, जिन्हें अपनी पत्नी से भी छिपाना चाहिए. अतः यहाँ पर सावधानी बरतनी चाहिए.
13 : - सीधेपन का लोग लाभ उठाते ही हैं. मनुष्य को इतना सरल-हृदयी नहीं होना चाहिए कि हर कोई उसे ठग ले. जंगल में सीधे खड़े वृक्षों को ही काटा जाता है. टेढ़े-मेढ़े वृक्ष बड़े सान से सीना ताने खड़े रहते है.
14 : - सुख सदैव किसी को नहीं मिलता है, ऐसा कोई प्राणी नहीं है, जो कभी बीमार नहीं होता. कोई कुल निष्कलंक नहीं होता, कोई न कोई दोष निकल ही आता है. अतः हमें परिस्थिति के अनुसार ही आचरण करना चाहिए.
15 : - बुरे मित्र का न होना ही अच्छा है , बुरे राजा से सदैव बिना राजा होना अच्छा है, सदाचरण से रहित शिष्यों से शिष्यों का न होना ही अच्छा है और आचरण रहित स्त्री से बिना स्त्री के रहना ही अच्छा कहा गया है.
16 : - समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
17 : - विद्वान को सत्य बोलकर, लोभी-लालची को धन देकर, अहंकारी को हाथ जोड़कर और मूर्ख को मनमानी से न रोककर वश में किया जा सकता है . ऐसा व्यवहार करके इनसे कोई भी मनचाहा काम करवाया जा सकता है.
18 : - बगुले से एकाग्रचित्त होने की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए. जिस प्रकार बगुला अपनी समस्त क्रियाओं को त्यागकर एकाग्रचित्त हो, अपने शिकार का ध्यान करता है और मुनिजनो को बगुले के तरह श्रेष्ठ आसन अपनाना चाहिए.
19 : - मूर्ख का हृदय सूना रहता है, पुत्र रहित घर सुना रहता है, लेकिन गरीब का घर इनसे कहीं अधिक सूना रहता है. अतः आदमी को परिश्रम करके इस पर विजय पानी चाहिए.
20 : - दुर्जन को साहस से, बलवान को अनुकूल व्यवहार से और समान शक्तिशाली को नम्रता से अथवा अपनी ताकत से वश में करना चाहिए.