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September 27, 2017
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2019-01-07 06:02
मुहब्बत में कभी अना नहीं होती
मुहब्बत में कभी अना नहीं होती चाह जाये जैसे इस से शिकायत नहीं होती ख़ुद से ज़्यादा तेरी हरबात पे एतबार है जानां जब एतबार है तो किसी बात की वज़ाहत नहीं होतई तुझे चाह है उतना कि ख़ुद को भुला बैठी हूँ अब
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2019-01-06 05:16
तिरे ख़यालों से भी दूर जाने वाला हूँ
तिरे ख़यालों से भी दूर जाने वाला हूँ मैं अपने सारे निशाँ ख़ुद मिटाने वाला हूँ हज़ार बार बुलाने पे भी नहीं आए तुम्हारे सामने मैं ख़ुद ही आने वाला हूँ जिला के फेंक दिए हैं वो तेरे सारे ख़त सवाल अपने में सारे
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2019-01-05 04:52
दर्द को दल के निहाँ-ख़ाने में आबाद किया
दर्द को दल के निहाँ-ख़ाने में आबाद किया तेरी चाहत में दिल-शाद को नाशाद किया डूब कर इशक़ में लिखने के सिले में हमने गौहर-ए-दिल को तेरे इशक़ में बर्बाद किया हाएए ए इशक़ तेरी राह में हमने क्योंकि हसरत-ए-दीद
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2019-01-04 05:49
हम वही तुम वही
साल तो हर साल बदलेगा देखना तो ये है कि किया रंग बदलेगा रूप बदलेगा चाल बदलेगी ढाल बदलेगा हम वही तुम वही क़िस्से वही वो ही कहानी ढारस नई उमंग तो नई है शायद अब के हाल बदलेगा फिर सोचती हूँ तुम वही में वही
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2018-12-31 05:54
ये दर्द तो आँखों से हरबार झलकता है
ये दर्द तो आँखों से हरबार झलकता है वो दर्द की सूरत ही मरे दिल में उबलता है दुनिया में रहो लेकिन दुनिया ना रहे दिल में इन्सान के ग़म में जो आँखों से छलकता है ज़हनों के मरासिम थे इक साथ भी हो जाते जाये ना
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2018-12-30 05:17
इन ग़मों से नजात ज़िंदगी में नहीं मिलती
इस से हमारा ना फिर कभी राबिता होगा गर होगा तो बेच ज़मीन-ओ-आसमां का फ़ासिला होगा इन ग़मों से नजात ज़िंदगी में नहीं मिलती मौत के बाद ही दुखों का ख़ातमा होगा कौनसा पुल ज़िंदगी का आख़िरी पल है जीते-जी ना इस बात
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2018-12-29 05:53
आवाज़ समाअत तक पहुंची ही नहीं शायद
ये दर्द तो आँखों से हरबार झलकता है वो दर्द की सूरत ही मरे दिल में उबलता है दुनिया में रहो लेकिन दुनिया ना रहे दिल में इन्सान के ग़म में जो आँखों से छलकता है ज़हनों के मरासिम थे इक साथ भी हो जाते जाये ना
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2018-12-28 06:12
वो सर्दीयों की सुबह में
वो सर्दीयों की सुबह में धुंद में लिपट कर हम जाएं इन कच्चे पक्के राहों से इस मंज़र तक जो पहुंच पाउं कि पत्तों पर जो बर्फ़ जमी रात की सर्द हवाऐं से अब धूप की कोसी किरनों से वो क़तरा-क़तरा पिघली है पौदों पर
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2018-12-27 05:36
हमारे दल के मंदिर में
हमारे दल के मंदिर में हसीं पत्थर की मूर्त है मुहब्बत के गुलाबों से उसे हर दिन सजाते हैं बिल्ली दे के तमन्नाओं की हम इस को भी मनातेहैं और अपने दिल को इस मूर्त के आगे हम झुकाते हैं हमें मालूम है ये बुत हमें
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2018-12-25 05:36
तेरा मेरा मिलना-जुलना
तेरा मेरा मिलना-जुलना प्यार वफ़ा की बातें करना मुझको देखने मेरे घर में अक्सर तेरा आना जाना कितना प्यारा लगता है ये तेरा आँचल में छिप जाना सह्र कहीं बदनाम ना कर दे ज़ालिम होता है ये ज़माना
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2018-12-24 06:31
ये तो कोई भाई हमारा लगता है
ये तो कोई भाई हमारा लगता है शादीशुदा हो के भी कुँवारा लगता है शेअर-ओ-सुख़न में भी करता है तबा आज़मा ही इस का तो हर शेअर प्यारा लगता है उनकी भोली सूरत पे ना जाना साहिब ये सिर्फ़ शक्ल से बेचारा लगता है हफ़्ता
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2018-12-23 05:06
हम ना जीते हैं और ना मरते हैं
हम ना जीते हैं और ना मरते हैं ना दर्द भेजो , ना तुम दवा भेजो कुछ तो रिश्ता है तुमसे कम बुख़तो कुछ नहीं ____ कोई बददुआ भेजो जो भी आ या फ़क़त मतलब के लिए आ या ख़ुदारा अब की बार कोई अहल वफ़ा भेजो
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2018-12-22 05:46
पेड़ को दीमक लग जाये या आदमजा़द को ग़म
पेड़ को दीमक लग जाये या आदमजा़द को ग़म दोनों ही को अमजद हमने बचते देखा कम तारीकी के हाथ पे बैअत करने वालों का सुरज की बस एक किरण से घट जाता है दम रंगों को कलीयों में जीना कौन सिखाता है! शबनम कैसे रुकना
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2018-12-21 05:00
ऐसा ख़ामोश तो मंज़र ना फ़ना का होता
ऐसा ख़ामोश तो मंज़र ना फ़ना का होता मेरी तस्वीर भी गिरती तो छनाका होता यूं भी इक बार तो होता कि समुंद्र बहता कोई एहसास तो दरिया की अना का होता सांस मौसम की भी कुछ देर को चलने लगती कोई झोंका तरी पलकों की हुआ
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2018-12-20 06:23
तो ही मेरा अपना है
तो ही मेरा अपना है तो ही मेरा सपना है गरचे मेरा ना बन पाया है फिर भी मेरा अपना है दिल ने तुझे अपनाया पै अपना तुझे बनाया है दिल को तो ही भाया है दिल में तो ही समाया है एक बार जो दिल में आया है वो दिल से
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2018-12-19 05:27
बस यूँही इक वहम सा है वाक़िया ऐसा नहीं
बस यूँही इक वहम सा है वाक़िया ऐसा नहीं आइने की बात सच्ची है कि मैं तन्हा नहीं बैठिए पेड़ों की उतरन का अलाव तापए बर्ग सोज़ां के सिवा दरवेश कुछ रखता नहीं उफ़ चटख़्ने की सदा से किस क़दर डरता हूँ में कितनी बातें
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2018-12-18 06:30
पिछले-पहर का सन्नाटा था
पिछले-पहर का सन्नाटा था तारा तारा जाग रहा था पत्थर की दीवार से लग कर आईना तुझे देख रहा था बालों में थी रात की रानी माथे पर दिन का राजा था इक रुख़्सार पे ज़ुल्फ़ गिरी थी इक रुख़्सार पे चांद खुला था ठोढ़ी
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2018-12-11 07:10
Beautiful flower
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2018-12-10 07:27
Beautiful flowers
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2018-12-09 07:44
Lovely flower
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